पीरियड्स के दौरान मेंस्ट्रुअल हाइजीन का रखें खास ख्याल, इन जरूरी बातों को न करें नजरअंदाज

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पीरियड्स यानी मासिक धर्म महिलाओं के शरीर में होने वाली एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। इसके बावजूद आज भी कई जगहों पर इससे जुड़ी बातें खुलकर नहीं की जातीं। जानकारी की कमी, सामाजिक झिझक और स्वच्छता सुविधाओं की कमी के कारण कई लड़कियों और महिलाओं को पीरियड्स के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है।

यूनिसेफ के मुताबिक, सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से मासिक धर्म संभालने के लिए केवल सैनिटरी प्रोडक्ट ही नहीं, बल्कि साफ पानी, साबुन, निजी शौचालय, सही जानकारी और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किए गए प्रोडक्ट के निपटान की सुविधा भी जरूरी है।

पीरियड्स के दौरान हाइजीन क्यों जरूरी है?

मासिक धर्म के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले पैड, टैम्पोन, मेंस्ट्रुअल कप या दूसरे उत्पादों को सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है। लंबे समय तक गीले या इस्तेमाल किए गए प्रोडक्ट को बदलने में लापरवाही करने से असहजता और त्वचा में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

साथ ही, हाथों की सफाई और जननांगों की सामान्य स्वच्छता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

सैनिटरी पैड कितनी देर में बदलना चाहिए?

सैनिटरी पैड को जरूरत और ब्लीडिंग की मात्रा के अनुसार नियमित रूप से बदलना चाहिए। यूनिसेफ के अनुसार, डिस्पोजेबल पैड को अधिकतम लगभग 4 से 6 घंटे में बदलना चाहिए। हालांकि, अगर ब्लीडिंग ज्यादा है और पैड इससे पहले भर जाता है, तो उसे पहले ही बदलना चाहिए।

इस्तेमाल किए गए पैड को कागज में लपेटकर उचित कूड़ेदान में डालना चाहिए। उसे खुले में फेंकना या टॉयलेट में फ्लश करना उचित नहीं है।

मेंस्ट्रुअल कप इस्तेमाल करती हैं तो इन बातों का रखें ध्यान

मेंस्ट्रुअल कप एक पुन: इस्तेमाल किया जाने वाला विकल्प है, लेकिन इसे सही तरीके से साफ करना बेहद जरूरी है। यूनिसेफ के अनुसार, कप को इस्तेमाल के दौरान लगभग 6 से 12 घंटे के भीतर निकालकर खाली, साफ और दोबारा इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हर पीरियड साइकिल के अंत में इसे उबालकर सैनिटाइज किया जा सकता है।

पहली बार कप इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को उत्पाद के निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए और असहजता या दर्द होने पर इसे जबरदस्ती इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

कपड़े का इस्तेमाल करती हैं तो रखें खास सावधानी

कुछ महिलाएं पीरियड्स के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। यह विकल्प तभी सुरक्षित हो सकता है जब कपड़ा साफ हो, उसे इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह धोया जाए और पूरी तरह सुखाया जाए।

यूनिसेफ के अनुसार, दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले कपड़े या रीयूजेबल पैड को धोने के लिए साफ पानी और साबुन जरूरी है। उन्हें पूरी तरह सूखने देना भी महत्वपूर्ण है।

गीले या ठीक से न धुले कपड़े को दोबारा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

पीरियड्स के दौरान शरीर की सफाई कैसे रखें?

  • पैड बदलने से पहले और बाद में हाथ साबुन से धोएं।
  • बाहरी जननांगों को साफ पानी से धोकर साफ रखें।
  • बहुत ज्यादा खुशबू वाले या इरिटेशन पैदा करने वाले उत्पादों से बचें।
  • इस्तेमाल किए गए सैनिटरी प्रोडक्ट को सुरक्षित तरीके से डिस्पोज करें।
  • पर्याप्त पानी पिएं और संतुलित भोजन लें।
  • आराम और नींद को नजरअंदाज न करें।

पीरियड्स से जुड़े मिथकों को तोड़ना भी जरूरी

मासिक धर्म को लेकर समाज में कई तरह की गलत धारणाएं आज भी मौजूद हैं। जैसे पीरियड्स के दौरान बाल नहीं धोने चाहिए, कुछ खाद्य पदार्थों को छूना नहीं चाहिए या महिलाओं को सामान्य गतिविधियों से दूर रहना चाहिए।

इनमें से कई मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार नहीं है। UNICEF के भारत संबंधी कार्यक्रमों में भी मासिक धर्म को लेकर सामाजिक वर्जनाओं और गलत धारणाओं को खत्म करने तथा लड़कियों को सही जानकारी देने पर जोर दिया गया है।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

हर महिला का पीरियड अनुभव अलग हो सकता है। लेकिन अगर लगातार बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो, दर्द बेहद तेज हो, पीरियड्स के बीच असामान्य रक्तस्राव हो, चक्कर या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या पीरियड पैटर्न में अचानक बड़ा बदलाव आए, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

पीरियड्स से जुड़ी किसी भी गंभीर या लगातार समस्या को केवल “सामान्य” मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पीरियड्स शर्म की नहीं, स्वास्थ्य की बात है

मासिक धर्म महिलाओं के स्वास्थ्य का सामान्य हिस्सा है। WHO का कहना है कि menstrual health को केवल स्वच्छता के मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और मानवाधिकारों से जुड़े विषय के रूप में देखा जाना चाहिए।

परिवार में लड़कियों और महिलाओं को पीरियड्स के बारे में खुलकर बात करने का माहौल मिलना चाहिए। स्कूलों और कार्यस्थलों पर भी साफ शौचालय, पानी, सैनिटरी प्रोडक्ट और सुरक्षित डिस्पोजल की सुविधा उपलब्ध होना जरूरी है।

सही जानकारी, स्वच्छता और बिना झिझक बातचीत से पीरियड्स के दौरान महिलाओं और लड़कियों का स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और रोजमर्रा की जिंदगी बेहतर हो सकती है।

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